आयुर्वेद क्या है ?

जब भी यह प्रश्न पूछा जाता है,झट से आँखों के आगे एक तस्वीर सी खींच जाती है जिसमें विश्व के प्राचीनतम सम्पूर्ण औषधि विज्ञान की अनुभूति होती है तथा जिसका आज भी वैकल्पिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में बहुतायत प्रयोग हो रहा है । समस्त समग्र स्वास्थ्य प्रणालियों के समान ही आयुर्वेद भी शरीर,मन एवं आत्मा के एक अपरिवर्तित संबंध पर जोर देती है ।
मुझे भरोसा है कि,हम सब अपने आस-पास के प्राकृतिक वस्तुओं से भिज्ञ है पर इनके रोग निरामय क्षमता पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं क्योंकि इसके संबंध में अभी काफी अध्ययन किया जाना बाकी है ।
तो चलिए अब आयुर्वेद क्या है इसे समझा जाए ।
औषधि विज्ञान में आयुर्वेद दर्शन वास्तव में समग्र चिकित्सा विज्ञान है जी इस सिद्धांत पर आधारित है कि मानव स्वास्थ्य आंतरिक एवं वाह्य परिवेश के समन्वयन के आधार पर निर्भर करता है । परम्परार के अनुरूप मानसिक स्वास्थ्य शारीरिक स्वास्थ्य के समान ही महत्वपूर्ण है । यह सिखाया गया था कि स्वस्थ,उत्पादक जीवन जीने के लिए मनुष्य को अपने मानसिक,शारीरिक तथा आध्यात्मिक स्वास्थ्य में समन्वय बनाकर चलना होगा ।

तदनुसार विभिन्न साहित्य एवं स्रोत की आधार पर हम आयुर्वेद की व्याख्या वैकल्पिक चिकित्सा प्रणाली के समग्र रूप में कर सकते हैं जिसकी परंपरा भारतीय उप महादेश में दो सदियों से भी पुरानी है पर आज भी की ऐसे लोग हैं जो आयुर्वेद को क्षद्म वैज्ञानिक(इसका अर्थ है इसे गलती से या गलत ढंग से विज्ञान माना जाता है) मानते हैं, पर ऐसे उद्धरण वैध नहीँ माने जा सकते क्योंकि आयुर्वेदिक चिकित्सा मूलतः जटिल जड़ी बूटी,खनिज एवं धातु पर आधारित होती है तथा इसका प्रमुख विकास वेदिक काल में हुआ था। बाद में कुछ गैर वेदिक प्रणाली जैसे कि बौद्ध,जैनियों द्वारा भी आयुर्वेद में वर्णित चिकित्सकी अवधारणाओं तथा पद्धतियों का अनुकरण किया गया ।

यह भी नहीं भूलना चाहिए कि पूर्व में संतों एवं साधुओं के प्रयास आज भी हमारी संस्कृति में मजबूत स्तम्भ के रूप में विराजमान हैं ।

हम यह स्पष्ट रूप से समझते हैं कि आयुर्वेद(पौधों तथा जड़ीबूटियों से चिकित्सा) उस समय से ही मौजूद है जब विश्व कई चीजों से अनभिज्ञ था तथा चिकित्सा के लिए प्रकृति में विद्यमान पादप तथा जड़ी बूटियों के रोग निवारण क्षमता पर ही निर्भर रहता था । चूंकि आज के आधुनिक युग में भी लोगों का झुकाव आयुर्वेदिक जड़ी बूटी चिकित्सा और उत्पादों की ओर अधिक हैं अतः आयुर्वेद को अवैज्ञानिक ठहरा कर वैज्ञानिक,कण आधारित, रसायन समाहित दवाओं के प्रचार का षडयन्त्र असफल रहा । आयुर्वेद के विकास तथा प्रसिद्धि क कई कारण हैं ।
अतः हम बीमारियों की चिकित्सा के लिए वर्षों पुरानी चिकित्सा पद्धति के बारे में बात करते हैं । प्रकृति में हमारे विश्वास ने भी एक मजबूत आधार तैयार किया है जिसे आधुनिक चिकित्सा द्वारा इसके प्रभाव तथा विश्वसनीयता के संबंध में तैयार किए गए मिथ्या प्रचार द्वारा डिगाया नहीं जा सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *